Sunday, May 31, 2009

हार बन सकती है एनडीए में टूट का कारण......




लोकसभा चुनावों मे हार के बाद एनडीए के नेता हार का ठिकरा एक दूसरे के सिर पर फोड़ने में लगे है मोटे तौर पर हार के लिए पार्टी की आंतरिक कलह, उम्मीदवारों का गलत चयन, गुटबाजी और वरुण गाँधी के कथित हिंदुत्व को जिम्मेदार माना जा रहा हैं। सवाल आडवाणी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारी को लेकर भी उठ रहे है। वैसे आखिर मे पार्टी की पूरी कमान तो आडवाणी के करीबी लोगो के हाथ मे ही थी लेकिन हार की जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नही है। राजस्थान,एम.पी. यूपी,महाराष्ट्र और उत्तराखंड में आशा से कम मिली सीटों ने तो भाजपा का गणित ही हिला के रख दिया। इससे एनडीए मे टूट का खतरा पैदा हो गया। पार्टी का हर कार्यकर्ता हार के अलग-अलग कारण गिनाने मे लगे हैं सार्वजनिक रुप मे माना जा रहा है कि पार्टी की अंदरुनी कलह पार्टी को ले डूबी। राजस्थान,दिल्ली एम.पी. यूपी,महाराष्ट्र और उत्तराखंड में उम्मीदवारों के चयन मे काफी खिचतान हुई थी। इन राज्यों मे पार्टी को उम्मीद के मुताबिक सीटें नही मिल पाई। कुछ नेताओं का कहना है कि भले ही पीलीभीत से वरुण गाँधी जीत गये हो लेकिन उनके भडकाऊ भाषणो का पार्टी को बहुत बड़ा खामियाजा भुगतना पडा। पार्टी के चुनाव प्रचार पर भी अंगुली उठाई जा रही है। प्रचार अभियान मे ये कहना कि मनमोहन सिंह कमजोर प्रधानमंत्री है इसे गलत बताया गया है। पार्टी मे शुरु से ही फुट थी फूट का आलम ये था कि चुनावों से पहले ही नेताओं न कानाफुसी करने मे लग गये थे अब विपक्ष का नेता कौन होगा आडवाणी ने तो विपक्ष का नेता के पद के लिए मना कर दिया है। और तो और ये देखो छतीसगढ के बस्तर के संसदीय क्षैत्र से लगातार चौथी बार जीते भाजपा के सांसद बलिराम कश्यप ने कहा कि आडवाणी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रुप मे उतारना ही पार्टी की सबसे बड़ी गलती थी। बहरहाल भाजपा के कई नेताओं की नज़रे विपक्ष के नेता बनने पर टिकी है। इस दौड मे राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, मुरली जोशी और जसवंत सिंह शामील है। इससे स्पष्ट होता है कि भाजपा मे एक ओर घमासान होने वाला है वो है विपक्ष के नेता का चुनाव।

1 comment:

  1. रिपोर्ट अच्छी है पर इतनी जल्दी कुछ कहना शायद जल्दबाजी होगी .

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